दुर् गा चगलीसग • ॥ दोहा ॥ • नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम् बे दुुः ख हरनी॥ • ननरंकार है ज् योनि िुम् हारी। निह ं लोक फैली उजियारी॥ • ॥ चौपाई ॥ • शशश ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटट विकराला॥ •रू प मािु को अधिक सुहािे। दरश करि िन अनि सुख पािे॥ • िुम संसार शजति लै कीना। पालन हेिु अन् न िन दीना॥ अन् नप र् ाा हुई िर्ग पाला। िुम ही आटद सुन् दरी बाला॥ •प्र लयकाल सब नाशन हारी। िुम र्ग ौरी शशिशंकर प् यारी॥ शशि योर्ग ी िुम् हरे र्गुर् र्ग ािें। ब्रह् मा विष्र्ु िुम् हें ननि ध् यािें॥

…. •रू प सरस् ििी को िुम िारा। दे सुबुद् धि ऋवि मुननन उबारा॥ िरयो रू प नरशसंह को अम्बा। परर्गट भई फाड़कर खम्बा॥ • रक्षा करर प्रह् लाद बचायो। टहरण्याक्ष को स् िर्गा पठा यो॥ लक्ष्मी रू प िरो िर्ग माहीं। श्र ी नारायर् अंर्ग समाहीं॥ •क्ष ीरशसन् िु में करि विलासा। दयाशसन् िु दीिै मन आसा॥ टहंर्ग लाि में िुम् हीं भिानी। मटहमा अशमि न िाि बखानी॥ • मािंर्ग ी अरु िमािनि मािा। भुिनेश् िरी बर्ग ला सुख दािा॥श्र ी भैरि िारा िर्ग िाररर् ी। निन् न भाल भि दुुः ख ननिाररर्ी॥ • केहरर िाहन सोह भिानी। लांर्गु र िीर चलि अर्ग िानी॥ कर में खप् पर खड्र्ग विरािै। िाको देख काल डर भािै॥

…. •रू प सरस् ििी को िुम िारा। दे सुबुद् धि ऋवि मुननन उबारा॥ िरयो रू प नरशसंह को अम्बा। परर्गट भई फाड़कर खम्बा॥ • रक्षा करर प्रह् लाद बचायो। टहरण्याक्ष को स् िर्गा पठा यो॥ लक्ष्मी रू प िरो िर्ग माहीं। श्र ी नारायर् अंर्ग समाहीं॥ •क्ष ीरशसन् िु में करि विलासा। दयाशसन् िु दीिै मन आसा॥ टहंर्ग लाि में िुम् हीं भिानी। मटहमा अशमि न िाि बखानी॥ • मािंर्ग ी अरु िमािनि मािा। भुिनेश् िरी बर्ग ला सुख दािा॥श्र ी भैरि िारा िर्ग िाररर् ी। निन् न भाल भि दुुः ख ननिाररर्ी॥ • केहरर िाहन सोह भिानी। लांर्गु र िीर चलि अर्ग िानी॥ कर में खप् पर खड्र्ग विरािै। िाको देख काल डर भािै॥

….. • सोहै अस्त्र और त्रत्र शला। िािे उठि शत्रु टहय शला॥ नर्ग रकोट में िुम् हीं विरािि। निहुुँलोक में डंका बािि॥ • शुम् भ ननशुम् भ दानि िुम मारे। रतिन बीि शंखन संहारे॥ मटहिासुर नृप अनि अशभमानी। िेटह अघ भार मही अकुलानी॥ •रू प कराल काशलका िारा। सेन सटहि िुम निटह संहारा॥ परी र्ग ाढ़ सन् िन पर िब िब। भई सहाय मािु िुम िब िब॥ • अमर पुरी औरो सब लोका। िब मटहमा सब रहें अशोका॥ज् िाला में है ज् योनि िुम् हारी। िुम् हें सदा प िें नर-नारी॥ •प्रे म भजति से िो यश र्ग ािें। दुुः ख दाररद्र ननकट नटहं आिें॥ध् यािे िुम् हें िो नर मन लाई। िन् म-मरर् िाकौ िुटट िाई॥ • सोहै अस्त्र और त्रत्र शला। िािे उठि शत्रु टहय शला॥ नर्ग रकोट में िुम् हीं विरािि। निहुुँलोक में डंका बािि॥ • शुम् भ ननशुम् भ दानि िुम मारे। रतिन बीि शंखन संहारे॥ मटहिासुर नृप अनि अशभमानी। िेटह अघ भार मही अकुलानी॥ •रू प कराल काशलका िारा। सेन सटहि िुम निटह संहारा॥ परी र्ग ाढ़ सन् िन पर िब िब। भई सहाय मािु िुम िब िब॥ • अमर पुरी औरो सब लोका। िब मटहमा सब रहें अशोका॥ज् िाला में है ज् योनि िुम् हारी। िुम् हें सदा पिें नर-नारी॥ •प्रे म भजति से िो यश र्ग ािें। दुुः ख दाररद्र ननकट नटहं आिें॥ध् यािे िुम् हें िो नर मन लाई। िन् म-मरर् िाकौ िुटट िाई॥

….. • िोर्ग ी सुर मुनन कहि पुकारी। योर्ग न हो त्र बन शजति िुम् हारी॥ शंकर आचारि िप कीनो। काम क्र ोि िीनि सब लीनो॥ • ननशशटदन ध् यान िरो शंकर को। काहु काल नटहं सुशमरो िुमको॥ शजति रू प का मरम न पायो। शजति र्ग ई िब मन पनििायो॥ • शरर् ार्ग ि हुई कीनिा बखानी। िय िय िय िर्ग दम् ब भिानी॥ भई प्र सन्न आटद िर्गदम्बा। दई शजति नटहं कीन विलम्बा ॥ • मोको मािु कष् ट अनि घेरो। िुम त्र बन कौन हरै दुुः ख मेरो॥ आशा िृष्र् ा ननपट सिािें। मोह मदाटदक सब त्र बनशािे ॥ • शत्रु नाश कीिै महारानी। सुशमरौं इकधचि िुम् हें भिानी॥ करो कृपा हे मािु दयाला। ऋद् धि-शसद् धि दै करहु ननहाला।। • िब लधर्ग जियऊं दया फल पाऊं। िुम् हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥श्र ी दुर्ग ाा चालीसा िो कोई र्ग ािै। सब सुख भोर्ग परमपद पािै॥ • देिीदास शरर् ननि िानी। करहु कृपा िर्ग दम् ब भिानी॥

श्री वविंधेश्वरी चगलीसग • ॥ दोहा ॥ नमो नमो ववन्ध्येश्वरी , नमो नमो जर्दम्ब । सन्ध तजनों के कगज में, करती नहीिं ववलम्ब ॥ • जय जय जय ववन्ध्यगचल रगनी। आददशक्तत जर्ववददत भवगनी ॥ शसंहिाटहनी िै िर्गमािा । िै िै िै त्रत्र भुिन सुखदािा ॥

… • कष्ट ननवगरण जै जर्देवी । जै जै सन्ध त असुर सुर सेवी ॥ मटहमा अशमि अपार िुम् हारी । शेि सहस मुख िर् ा ि हारी ॥ दीनन को दु:ख हरत भवगनी । नदहिं देखो तुम सम कोउ दगनी ॥ सब कर मनसा पुरिि मािा । मटहमा अशमि िर्गि विख्यािा ॥ जो जन ् यगन तुम् हगरो लगवै । सो तुरतदह वगिंनित फल पगवै ॥

.. • िुम् हीं िैष्र् िी िुम् हीं रुद्र ानी । िुम् हीं शारदा अरु ब्रह् मानी ॥ रमग रगधधकग श् यगमग कगली । तुम् हीिं मगतु सन्ध तन प्र नतपगली ॥ उमा माध्िी चण्डी ज् िाला । िेधर्ग मोटह पर होहु दयाला ॥ 10 तुम् हीिं दहिंर् लगज महगरगनी । तुम् हीिं शीतलग अरु ववज्ञ गनी ॥ • दुर्ग ाा दुर्ग ा विनाशशनी मािा । िुम् हीं लक्ष् मी िर्ग सुख दािा ॥

.. • तुम् हीिं जगह् नवी अरु रुद्र गनी । हे मगवती अम्ब ननवगानी ॥ अष् टभुिी िाराटहनन देिा । करि विष्र्ु शशि िाकर सेिा ॥ चौंसट्ठी देवी कल्यगनी ।र् ौरर मिंर् लग सब र्ु नखगनी ॥ पाटन मुम् बादन् ि कुमारी । भाटद्र काशल सुनन विनय हमारी ॥ बज्रधगररणी शोक नगशशनी । आयु रक्ष िनी ववन्ध् यवगशसनी ॥

… • िया और वििया िैिाली । मािु सुर्गन् िा अरु विकराली ॥ नगम अनन्ध त तुम् हगरर भवगनी । वरनै ककशम मगनुष अज्ञ गनी ॥ िापर कृपा मािु िब होई । िो िह करै चाहे मन िोई ॥ 20 कृपग करहु मोपर महगरगनी । शसद् ध करहु अम् बे मम बगनी ॥ िो नर िरै मािु कर ध् याना । िाकर सदा होय कल्याना ॥

… • ववपनत तगदह सपनेहु नगदहिं आवै । जो देवीकर जगप करगवै ॥ िो नर कहुँ ऋर् होय अपारा । सो नर पाठ करै शि बारा ॥ ननश्चय ऋण मोचन होई जगई । जो नर पगठ करै धचत लगई ॥ अस् िुनि िो नर पढ़े पढ़ अिे । या िर्ग में सो बहु सुख पािे ॥ जगको व् यगधध सतगवे भगई । जगप करत सब दूर परगई ॥

… • िो नर अनि बन् दी महुँ होई । बार हिार पाठ करर सोई ॥ ननश् चय बन्ध दी ते िुट जगई । सत् य वचन मम मगनहु भगई ॥ िापर िो किु संकट होई । ननश् चय देविटहं सुशमरै सोई ॥ 30 जग कहँ पुत्र होय नदहिं भगई । सो नर यग ववधध करे उपगई ॥ पाुँच ििा िो पाठ करािै । नौरािन महुँ विप्र जिमािै ॥

… • ननश्चय होदहिं प्र सन्धन भवगनी । पुत्र देदहिं तग कहँ र्ु णखगनी ॥ध् ििा नाररयल आन चढ़ािै । विधि समेि पिन करिािै ॥ ननत प्र नत पगठ करै मन लगई ।प्रे म सदहत नदहिं आन उपगई ॥ यह श्र ी विन्ध्याचल चालीसा । रंक पढ़ि होिे अिनीसा ॥ यह जन अचरज मगनहु भगई । कृपग दृक्श् ट जगपर होइ जगई ॥ िै िै िै िर्ग मािु भिानी । कृपा करहु मोटह ननि िन िानी ॥ 40

FEW SUKTA .. • या देिी सिाभिेिु विष्र्ु मायेनि शजददिा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में ववष् णुमगयग कहलगती हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेिु चेिनेत् यशभ िीयिे। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी सभी प्र गणणयों में चेतनग के रू प में प्र नतबबक्म् बत होती हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

…. • या देिी सिाभिेिु बुद् धिरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में बुद् धध रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेिु ननद्र ारू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में ननद्र ग रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

… • या देिी सिाभिेिु क्षु िारू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में भूख के रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेिु िायारु पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में िगयग रू प में ननवगस करती हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

…. • या देिी सिाभिेिु शजतिरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में शक् तत रू प से क्स् ित हैं, उनको नमस्कगर है, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कग र है। • या देिी सिाभिेिु िृष्र् ारू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में प् यगस के रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

…. • या देिी सिाभिेिक्ष ाजन् िरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में सहनशीलतग के रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेि िानिरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में मूल कगरण रू प से क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

…. • या देिी सिाभिेि लज् िारु पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में लज् जग रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेिु शांनिरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में शगिंनत रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

…. • या देिी सिाभिेिु श्रद् िारू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में श्रद् धग रू प से क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेि काजन् िरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में मनोहरतग और सौं दया के रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

… • या देिी सिाभिेिु लक्ष् मीरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में सौभगग् य रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेिु िृविरु पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में वृवि रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

…sukta • या देिी सिाभिेिु स् मृिीरु पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में स् मृनत रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेिु दयारू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में दयग रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

… • या देिी सिाभिेिु िुजष् टरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में सिंतोष रू प से क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • या देिी सिाभिेिु मािृरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में मगतग रू प में ननवगस करती हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

• या देिी सिाभिेिु भ् ाुँनिरू पेर् संजस् ििा। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • जो देवी समस् त प्र गणणयों में मोह रू प में क्स् ित हैं, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है। • इजन्द्र यार् ामधिष् ठात्र ी भिानां चाखखलेिु या। • भिेिु सििं िस् यै व् याजप् िदेव् यै नमो नमुः ॥ • जो देवी समस् त लोकों में प्र गणणयों की इक्न्धद्र यों को ननयिंबत्र त करती हैं, • उनको नमस्कगर है , जो समस् त प्र गणणयों में सदैव व् यगप् त रहती हैं। • धचनिरु पेर् या कृत्स् नम एिि व् याप् य जस् ििा िर्ग ि्। • नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमस्िस्यै नमो नमुः॥ • (उसे नमस्कगर है ) जो चेतनग के रू प में इस ब्रह् मगिंड में व् यगप् त है और इसमें ननवगस करती है, • उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको नमस्कगर है , उनको बगर-बगर नमस्कगर है।

माुँ पािािी के 108 नाम • आद्य –प्र गरिंशभक यग कफर वगस्तववकतग • आयाा – यह देवी कग नगम है • अभव्या – यह नगम भय कग प्र तीक है • अएंदरी – भर्वगन इिंद्र की शक्तत • अजननज्िाला – यह नगम आर् कग प्र ती क है • अहंकारा – यह नगम र् ौरव कग प्र तीक है • अमेया – यह नगम उपगय से परे कग प्र ती क है • अनंिा – यह नगम अनिंत कग एक प्र तीक है • अनंिा – इस नगम कग अिा अनिंत है • अनेकशस्त्रहस्िा – कई हधियगरों को र खने वगली देवी • अनेकािारना – कई रिंर्ों की देवी • अपर्ाा – एक वह व् यक्तत जो उपवगस के दौरगन कुि नहीिं कहतग है यह उसकग प्र तीक है • अप्रौिा – वह जो उम्र नही लेतग यह उ सकग प्र तीक है • बहुला – ववशभन्धन रू पों वगली • बहुलप्रे मा- हर ककसी से प् यगर करने वग ली • बलप्रदा – यह नगम तगकत कग दगतग कगप्र तीक है • भाविनी – खूबसूरत औरत कग प्र तीक • भव्य – भववष्य कग प्र तीक • भद्राकाली – कगली देवी के रू पों में से एक देवी

माुँ पािािी के 108 नाम • भिानी – यह ब्रह् मगिंड की ननवगसी देवी • भिमोचनी –ब्रह् मगिंड की समीि क कग प्र तीक • भिप्रीिा –ब्रह् मगिंड में हर ककसी से प् यगर पगने वगली देवी • भव्य – यह नगम भव्यतग कग प्र तीक है •ब्र ाह्मी – वह देवी जो भर्वगन ब्रह् मग की शक्तत है •ब्रह् मिाटदनी – हर जर्ह उपक्स्ित देवी • बुद् धि –ज्ञ गनी देवी • बुजध् हदा –ज्ञ गन की दगत्री दे वी • चामुंडा - वह जो चिंड और मुिंड रगिस की हत्यग करने वगली देवी है • चंद्रघंटा – यह नगम तगकतवर घिंटी कग प्र तीक है। • चंदामुन् दा विनाशशनी –क् जसने चिंड और मुिंड की हत् यग की वह देवी • धचन्िा – तनगव कग प्र तीक • धचिा – मृत् यु-बबस्तर कग प्र ती क • धचनि – सोच मन कग प्र तीक • धचत्रा – सुरम् य कग प्र तीक • धचिरूपा – सोच यग ववचगरशील रगज्य कग धोतक • दतशाकन्या – दि की बेटी कग नगम • दतशायाज्नाविनाशशनी – दि के बशलदगन को टोकने वगलग • देिमािा – वह जो देवी मगँ है

माुँ पािािी के 108 नाम • दुर्ग ाा – अपरगजेय देवी • एककन्या – बगशलकग कग प्र ती क • घोररूपा – भयिंकर रू प कग प्र ती क •ज्ञ ाना –ज्ञ गन कग प्र तीक • िलोदरी –ब्रह् मगिंड में ननवगस करने वगली देवी • िया – ववजयी कग प्र तीक • कालरात्रत्र – वह देवी जो कगली है और रगत के समगन ददखगई देती है। • ककशोरी – ककशोर कग प्र तीक • कलामंजिराराजिनी – सिंर्ीत पगयल कग प्र तीक • कराली – दहिंसक कग प्र तीक • कात्यायनी – बगबग कत्यगनन इस नगम को पूजते है • कौमारी- ककशोर कग प्र तीक • कोमारी- सुिंदर ककशोर कग प्र तीक • कक्रया – लडगई कग प्र तीक •क्र्रू ना-क्रू र कग प्र तीक • लक्ष्मी – वह जो धन की देवी है • महेश्िारी – वह जो भर्वगन शश व की शक्तत है • मािंर्गी – वह जो मतिंर्ग की दे वी

माुँ पािािी के 108 नाम • मिुकैिाभाहंत्र ी – वह देवी क् ज सने रगिस और मधु और कैटभ को मगर ददयग • महाबला – शक्तत कग प्र तीक • महािपा – तपस्यग कग प्र तीक • महोदरी – एक ववशगल पेट में ब्रह् मगिंड में रखने वगली • मनुः – मन कग प्र तीक • मिंर्ग ामुननपुजििा – बगबग मतिंर्ग द् वगरग पूजी जगने वगली • मुतिाकेशा – खुले बगल वगली • नारायर्ी – भर्वगन नगरगयण ववनगशकगरी ववशेषतगएँ • ननशुम् भाशुम् भाहनानी – देवीक् जसने शुम् भ, ननशुम् भ को मगरग है • मटहिासुर मटदानी –क् जस देवी ने मदहषगसुर को मगर है • ननत्या – अनन्धत कग प्र तीक • पािाला – रिंर् लगल कग प्र तीक • पािालाििी – लगल और सफ़द घगर ण करने वगली • परमेश्िरी – अिंनतम देवी • पिाम्बरापररिान्ना – चमडे से बनग हुआ एक प्र कगर कग कपडग • वपनाकिाररर्ी – शशव कग बत्र शूल कग नगम •प्रत् यक्ष – असली •प्र ौढ़ा – पुरगनग

माुँ पािािी के 108 नाम • पुरु िाकृनि – आदमी कग रू प ले ने वगली देवी • रत्नवप्रया – सजी देवी श्रृिंर् गर करने वगली • रौद्र मुखी – ववनगशक रुद्र की तरह भयिंकर चेहरग वगली • साध्िी – आशगवगदी देवी • सदर्गनि – मोि कन्धयगदगन • सिाास्त्रिाररर्ी – शमसगइल हधियगरों के स् वगशमनी • सिादाना िाघानिनी - सभी रगिसों को मगरने के शलए योग्य • सिामंत्रमयी – सोच के उपकरण • सिाशास्त्रमयी – वह जो चतुर है सभी शसद् धगिंतों में • सिािाहना – सभी वगहनों की सवगरी • सिाविद्या – जगनकगर सब जगनने वगली • सिी – वह देवी जो अपने पनत के अपमगन पर अपने आप को जलग दे • िर्गििननी – सगरे सिंसगर की मगँ • सिा – सब से ऊपर • सत्य – सत्य • सत्यानादास िरुवपनी – शगश्व त आनिंद • सावित्री – वह जो सूया भर् वगन की बेटी • शाम्भिी – शिंभू की पत् नी

माुँ पािािी के 108 नाम • शशिदिी – भर्वगन शशव के रग जदूत • शलिाररर् ी – वह जो बत्र शूल धगरण करतग है • सुंदरी – भव्य • सुरसुन् दरी – बहुत सुिंदर • िपजस्िनी – तपस् यग में लर् ी हुई •त्रत्र नेत्र – तीन आँखों कग व् यक् तत • िाराही – जो व् यक्तत वगरगह पर सवगरी करतग हुआ • िैष्र्िी – अपरगजेय • िनदुर्ग ाा – वह जो जिंर्लों की देवी • विक्रम – दहिंसक • विमलौत्त्तत्काशशानी – खुशी प्र दगन करनग • विष्र्ु माया – भर् वगन ववष् णु कग मिंत्र • िृिामिा – मगँ कग पुरगनगस् वरूप • यनि – दुननयग कग त् यगर् करने वगलग • युििी – औरत • अनेकास्त्रिाररर्ी – वह देवी जो कई हधियगरों को धगरण करती हो

दुर्ग ाा मािा की आरिी • िय अंबे र्ग ौरी , मैया िय श् यामा र्ग ौरी। िुमको ननशशटदन ध् यािि, हरर ब्रह् मा शशिरी॥ ओम िय अं बे र्ग ौरी मांर्ग शसन् दर विरािि, टीको मृर्ग मद को। उज्ििल से दोउ नैना , चन्द्रिदन नीको॥ ओम िय अंबे र्ग ौर कनक समान कलेिर, रतिाम्बर रािै। रतिपुष् प र्ग ल माला, कण्ठन पर सािै॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी केहरर िाहन रािि, खड्र्ग खप्परिारी। सुर-नर-मुनन-िन सेिि, निनके दुखहारी॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी

…. • कानन कुण् डल शोशभि, नासाग्रे मोिी। कोटटक चन्द्र टद िाकर, सम रािि ज् योनि॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी शुम् भ-ननशुम् भ त्र बदारे, मटहिासुर घािी। ि म्र विलोचन नैना, ननशशटदन मदमािी॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी चण्ड -मुण् ड संहारे, शोखर्ि बीि हरे। मिु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ओम िय अंबे र्ग ौरीब्र हमार् ी रुद्र ार् ी िुम कमला रानी। आर्गम -ननर्गम -बखानी, िुम शशि पटरानी॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी चौंसठ योधर्गनी मंर्गल र्ग ािि , नृत् य करि भैरूं । बािि िाल मृदंर्ग ा, अरु बािि डमरु॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी

….. • िुम ही िर्ग की मािा, िुम ही हो भरिा। भतिन की दु:ख हरिा, सुख सम् पवि करिा॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी भुिा चार अनि शोशभि, िर-मुद्र ा िारी। मनिाजन्िि फल पािि , सेिि नर-नारी॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी कंचन िाल विरािि, अर्ग र कपर बािी।श्र ीमालकेिु में रािि, कोटट रिन ज् योनि॥ ओम िय अंबे र्ग ौ रीश्र ी अम्बेिी की आरिी , िो कोई नर र्ग ािै। कहि शशिानन्द स् िामी , सुख सम् पवि पािै॥ ओम िय अंबे र्ग ौरी, ओम िय अंबे र्ग ौरी िोर से बोलो िय मािा दी, सारे बोले िय मािा दी। बोल सांचे दरबार की िय

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