Avantiswami

�शला-लेख: मौन का महाका� A Photographic Journey to the Avantivarman Temple Ruins, Kashmir पाषाणकेआँसू,पवतकामौन

पहाड़ों क� गोद म� सोया है इक गुज़रा ज़माना, इन प�रों से पूछो ज़रा, स�दयों पुराना अफ़साना h Gatea   Pas

समय क� धारा म� बह गए िकतने ही दौर यहाँ, पर छोड़ गए ये खंडहर, अिमट यादों का कारवां Ete Fop

खड़े यहाँ जो मेहराब�, वे अतीत का अवगुंठन ह�, छूकर इनको बहती हवाएँ, गातीं िवरह के गुंजन ह� h Acha  Fgo e D ea

झेल कर झंझावात समय के, िमटे नहीं ये अिमट िव�धान, जड़ पाषाण क� छाती म� भी, धड़क रहा युग का अ�भमान h Ech  Ue Sp i 

झेल कर झंझावात समय के, िमटे नहीं ये अिमट िव�धान, जड़ पाषाण क� छाती म� भी, धड़क रहा युग का अ�भमान h Ech  Ue Sp i 

पाषाण क� छाती म� स् पं �दत, युगों पुरानी आ�द चेतना, मू� �छ�त कला के अ�धरों पर, थम गई महाकाल क� वंदना h Deoi Rlie

जहाँ जड़ता भी चेतन बन कर, �चर-िमलन का राग सुनाती है,प्र कृ ित क� इस एका�त गुहा म�, �शला भी भावुक हो जाती है h Di Eac

अंबर को छूने क� चाह �लए, खड़े ह� ये अतीत के भ� स् तं भ,शून्यता के इस महा-काव्य म�, जैसे मौन ही है आ�द और अंत Par gas  Sk

शून्य क� ओर ले जाती ह�, ये िव�ृ त और थमी सीिढ़याँ, इन्हीं प�थरीले सोपानों पर, सो ग� न जाने िकतनी स�दयाँ h Asced Step

खंिडत वैभव के अवशेषों पर, मौन का पहरा गहरा है, इितहास जहाँ थक कर सोया, वहाँ वत�मान ठहरा है h Layere Foudati

दो सजल नयन से खड़े यहाँ, सा�क्षी बनकर यु ग-प�रवत�न के, हरी-भरी इस नीरवता म�, अवशेष बचे बस अच�न के Tw Ll Par

िग�रराज के अचल आँचल म�, �समटा पाषाणों का यह िवलाप, स�दयों क� इस धूप-छाँह म�, भूल गए सब अपना संताप h Weaere Courtya

Photographs : Ripudaman Raj Conceptualised & Designed by Ripudaman Raj