यह पुस्तिका दिवाली के अवसर पर घर, कार्यालय या कारखाने में सात्विक वैदिक पूजा, हवन, अनुष्ठान, पाठ और कथा करवाने के लिए मुहूर्त और पूजन सामग्री प्रदान करती है। इसमें धनतेरस, लक्ष्मी चोपड़ा पूजन, वास्तु पूजन और सामुदायिक उत्सवों के लिए समय स्लॉट बुक करने की जानकारी दी गई है। पुस्तिका में दीप ज्ञान नामक एक खंड है जो बताता है कि दिवाली का पूजन कार्तिक कृष्ण पक्ष, प्रदोष काल, अमावस्या की रात को क्यों…
यह पुस्तिका दिवाली पूजन के लिए एक संदर्भ गाइड है, जो मुख्यतः हिंदू धर्म के अनुयायियों और पूजा करने वालों के लिए है। इसमें पंडित श्री धर्मेंद्र जी द्वारा सात्विक वैदिक पूजा, हवन, अनुष्ठान, पाठ और कथा सेवाओं की जानकारी दी गई है।
पुस्तिका में दीप ज्ञान नामक खंड है जो दिवाली पूजन के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारणों की व्याख्या करता है। इसमें बताया गया है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या की रात को सूर्य और चंद्र के एक ही कला में आने से वातावरण दूषित होता है और दीप जलाकर नकारात्मक शक्तियों का नाश किया जाता है।
पुस्तिका में श्री महालक्ष्मी स्तोत्रम के 11 श्लोक दिए गए हैं, जिनमें देवी महालक्ष्मी की स्तुति, उनके शंख-चक्र-गदा धारण, गरुड़ पर आरूढ़ होने और सर्वज्ञ, सर्ववरदे, सर्वदुःख हरे आदि गुणों का वर्णन है।
पुस्तिका में श्री गणेश आरती के 5 पद दिए गए हैं, जिनमें गणेश जी की वंदना, उनके एक दंत, चार भुजाओं, मूषक वाहन और लड्डू भोग का वर्णन है। इसमें गणपति बप्पा मोरया और गजानन भगवान की जय के उद्घोष भी शामिल हैं।
पुस्तिका में श्री लक्ष्मी जी आरती के पद दिए गए हैं, जिनमें माता लक्ष्मी की स्तुति, उन्हें उमा, रामा, ब्रह्माणी, जगत माता, दुर्गा रूप निरंजनी और पाताल निवासिनी के रूप में वर्णित किया गया है।