प्रवासीजुलाई 2026 वाराणसी SPECIAL ISSUE https://girmitiya.inrLongitudinal Studies in Social and Human Sciences Funded by Indian Council of Social Science Research (ICSSR) टश औप नवे शक शासन के दौरान भारतीय श्र मक प्र वास का सांस् कृ तक इ तहास (A Cultural History of Indian Labour Migration During British Colonial Rule) A Collaborative Research Project of: Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith, University of Hyderabad, Banaras Hindu University & Central University of South Bihar1
प्रवासीजुलाई 2026 वाराणसी SPECIAL ISSUE https://girmitiya.inप रयोजना प रचय संपादक य - नरंजन सहाय एवं गजेन्द्र पाठक दो दवसीय शोध एवं प्र ावली प्र माणन काय क्र मस् मृ त-सेतु स् मृ त, संघष और संवाद - न लन भारती ड जटल मान वक और गर म टया वरासत : कृ म बु म ा के दौर म अनुसंधान के नए तज- ट . एन. स ह भा षक समुद्र संगम : गर म टया समुदाय क भा षक या ा- पंचानन मोहंती गर म टया अध् ययन क अवधारणा - गजेन्द्र पाठक वमोचन - ‘प्र वासी’ प्र वेशांक इ तहास, वरासत और गर म टया अ स् मता पूव यूरोपीय शक रा उप नवेश म गर म टया भारतीय प्र वा सय क पहचान, वरासत और सांस् कृ तक नरंतरता- आशुतोष कुमार प्र वासी प रप्रेक्ष् य से गर म टया पहचान का पुनपा ठ - अम् बा पाण् डेय इ तहास क ओर पुन – गर म टया जीवन का आघात - स् मृ त स ह गर म टया संस् कृ त : परंपरा, अ भव्य और संरक्ष ण गर म टया इ तहास और संस् कृ त का सनेमाई नैरे टव - धम न्द्र नाथ ओझा गर म टया संस् कृ त: भोजन, भाषा और सांस् कृ तक वरासत- अनुराधा पाण् डेय प रयोजना प्रस् ताव : संवाद, समीक्ष ा और प रष् कार प रयोजना प्रस् ताव प्रस् तु त - अजीत आया वशेषज्ञ समूह ारा प्रस् ताव पर टप् पणी- पंचानन मोहंती, अम् बा पाण् डेय, अधीर कुमार, स् मृ त स ह शोध उपकरण, प्र ावली एवं प्र ाथ मक आँकड़े (प रचचा ) शोध उपकरण,प्र ावली, प्र ाथ मक आँकड़े संग्र हण - वषा गुप् ता शोध उपकरण - चंदन ीवास् तव वशेषज्ञ प्र त क्र या - पंचानन मोहंती, अम् बा पाण् डेय, अधीर कुमार अद्य तन प्र ावली - रचना वश्व कमा प्र वासन वमश : स ांत, भा षक पहचान और गर म टया इ तहास प्र वासी समुदाय और भा षक पहचान - पंचानन मोहंती 04 05 07 10 12 14 16 19 20 22 26 29 30 31 33 35 37 41 43 54 अनुक्र मा णका 2
प्रवासीजुलाई 2026 वाराणसी SPECIAL ISSUE https://girmitiya.in समुद्र माग से गर म टया प्र वास:जहाजी-भाई क अनकही गाथा- न लन भारती, सृ सहायप्र वासन : स ांत, अवधारणा और समकालीन प रप्रेक्ष् य - मेघना गुप् ताप्र वासी भारतीय : भू-राजनी त, सांस् कृ तक अ स् मता और नेतृत् व जहाज़ क लहर पर जन् मा नया जीवन: गर म टया स् य क आत् म नभ रता क कहानी- नरंजन सहाय भारतीय अंतरा ीय प्र वासी श्र मक भू-राजनै तक प रप्रेक्ष् य और समकालीन चुनौ तयाँ- न लन भारती, मुस् कान कंवर भवानी दयाल सन् यासी : गर म टया चेतना, सांस् कृ तक अ स् मता और वै क भारतीयता के अग्रदू त- वशाल कुमार प्र वासी भारतीय क सांस् कृ तक नरंतरता और फ़ जी म रामकथा का वत मान प रदृश् य - वीणा कुमारी समापन नह , नई शुरु आत गर म टया इ तहास और सांस् कृ तक वरासत- ओमप्र काश स ह 'पहला गर म टया' म अ भव्यक्त जीवन-सत् य - अधीर कुमार सा ात् कार भाषा, संस् कृ त और प्र वासी स् मृ त- पंचानन मोहंती गर म टया इ तहास का पुनपा ठ - आशुतोष कुमार औप नवे शक अथ व्य व ा, श्र म प्र वासन और गर म टया व्य व ा - न लन भारती इ तहास, सा हत् य और सांस् कृ तक स् मृ त के आलोक म गर म टया जीवन का पुनपा ठ - स् मृ त स ह दृश् य इ तहास, अ भलेखागार और गर म टया अध् ययन क नई दशाएँ- धम न्द्र नाथ ओझा पहला गर म टया और गर म टया जीवन-सत् य- अधीर कुमार भारतीय श्र म प्र वासन, स् मृ त और सांस् कृ तक पहचान - प्र यंका पाठ सा ह त् यक समीक्ष ा और पूव काय संकलन- रु च स ह ग त व धयाँ हमारे संरक्ष क हमारे सलाहकार 56 59 61 63 65 67 69 71 73 76 81 87 93 95 97 103 105 107 108 अनुक्र मा णका 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 3
प रचय गर मिटया: महासागर क पार ृ तय क अनन्त जड़ क तलाश जुलाई 2026 SPECIAL ISSUE https://girmitiya.inप्र वासी भारतीय सामा जक िवज्ञ ान अनुसंधान प रषद (ICSSR) के अंतग त संचा लत शोध प रयोजना ‘ि टश औप नवे शक शासन के दौरानश्र िमक प्र वास का स ृितक इितहास’ केवल इितहास के प को पलटने का प्र यास नह है; यह उन असंख्य आवाज़ को फर से सुनने क को शश है, जो कभी समुद्र क लहर और औप नवे शक अिभलेख के बीच दबा द गई थ । उ ीसव शताब्द के तीसर दशक से आरम्भ हुई यह यात्र ा लाख भारतीय को अपने ग व , स्मृ ितय और संबंध से दूर ले गई। ‘एग्र ीम ट’ शब्द के अप ंश से बना “ गरिमट” उनके जीवन का भाग्य बन गया-ऐसा एग्र ीम ट, जसे वे प्र ायः पढ़ भी नह सकते थे। जहाज़ ने उ फजी, मॉर शस, त्र नदाद, गुयाना, सूर नाम और द ण अ का जैसे दूरस्थ देश तक पहुँचाया, जह उ ने केवल ग े के खेत नह स चे, ब अपने साथ भारत क िम , भाषा, गीत और िव ास के बीज भी रोपे। समय बदला, भूगोल बदला, पर स्मृ ितय क जड़ बनी रह । भोजपुर लोकधुन ने नए प क हवाओ म नया स्व र पाया। पव - ोहार ने नए प रवेश के साथ स्व यं को ढाला, क ु उनक आ ा भारतीय ह रह । रामायण के पाठ, लोकगीत क धुन , िववाह क रस्म और पी ढ़य से सुनाई जाने वाली कहा नय -इन सबने समुद्र के पार भी एक स ृितक घर बनाए रखा। यह प रयोजना इ िबखर हुए स ृितक सूत्र को एक साथ जोड़ने का प्र यास है। अिभलेखीय द ावेज़ , जहाज़ के धुँधले रकॉड , अप्र का शत पत्र , मौ खक इितहास और लोक-स्मृ ितय के माध्य म सेयह प रयोजना उन जीवन-कथाओ को पुनः सामने लाती है, जो इितहास के औपचा रक वृ त म अक्स र अनुप स्थ त रह ह । कभी कसी पुराने द ावेज़ म दज एक जहाज़ का नाम, कभी पी ढ़य से सुनाई जाती कोई दाद क कथा, तो कभी कसी लोकगीत म छपी मातृभूिम क पुकार-हर टुकड़ा िमलकर स्मृ ित क एक िवशाल चत्र यव नका रचता है। यह केवल अतीत का पुनस्म रण नह है। यह पहचान, िवस्थ ापन और स ृितक जीवटता को समझने क एक सतत् प्र या है। ‘ गरिम टया’ अनुभव हम यह सखाता है क पहचान स्थ र नह होत ; वे समय के साथ, बदलती ह , कुछ यात्र ाएँ मं ज़ल तक पहुँचकर समाप्त नह होत ; वेस्मृ ितय , लोकगीत और पी ढ़य क स ृितक चेतना म जीिवत रहती ह । गरिम टय क कहानी भी ऐसी ह एक अनवरत यात्र ा है-समुद्र के पार िवस्थ ापन क , संघष क , और अपनी जड़ को बचाए रखने क । नए संदभ म नया अथ ग्र हण करती ह , फर भी अपने मूल से जुड़ रहती ह । आज जब हम ि टश सा ाज्य वाद के षड्यन्त्र के शकार अपने लाख पुरख का स्म रण कर रहे ह , तब हम केवल इितहास के प े नह पलट रहे ह ब हम समय के महासागर को पार करते हुए उस भिवष्य क ओर भी देख रहे ह , जह से िवस्मृ त संबंध का एक नया सल सला शुरू हो रहा है। ...कुछ जड़ , चाहे कतनी ह दूर न चली जाएँ, अपने ोत को कभी नह भूलत ।डॉ. चंदन ीवास्त व श ा िवभागकाशी ह ू िवश्व िव ालय, वाराणसी डॉ. रचना िवश्व कम वा णज्य एवं व्य वसाय अध्य यन िवभागद ण िबहार केन्द्र य िवश्व िव ालय, गयाडॉ. अनुराधा पा ेय ह एवं सं ृित अ धकार भारतीय उ ायोग, लंदन (यू.के.)कैप्ट न ओम प्र काशसमुद्र माग िवशेषज्ञ एवं उद्य मीलंदन (यू.के.) प्र ो. गजेन्द्र पाठकहैदराबाद िवश्व िव ालय, हैदराबाद ह िवभाग प रयोजना समन्व यकप्र ो. नरंजन सहाय ह एवं अन्य भारतीय भाषा िवभागमहा ा ग धी काशी िव ापीठ, वाराणसी प रयोजना नदेशक वाराणसी 4
संपादक य औप नवे शक अतीत क ृितय क देहर पर संवाद SPECIAL ISSUE https://girmitiya.inप्र वासीजुलाई 2026 वाराणसी 5कैसी िवडंबना है क जस तेरहव शताब्द के भारत म इटली के माक पोलो को भारत म सोने क जु त्त य पहने लोग िमले थे और उन्न ीसव सद के पूव म इं ड वासी लॉड मैकाले को कोई भीख म गते तक नह दखा था उस देश क संतान को दास प्र था के ख़ा े के बाद दु नया के श्र म बाजार म नीलाम होना पड़ा . गुलामी का यह रू प भारत के औप नवे शक अतीत का काला अध्य ाय है जस पर अभी भी अंधकार के बादल जमे हुए है। भारत के कसान , खेितहर श्र िमक और बुनकर ने स दय से अपने प रश्र म के बल पर भारत क अथ व्य व ा को दु नया म सव श्रेष्ठ ान पर रखा था । दु नया ने स दय से इनक ताकत को पहचाना था और आक्र मणका रय के अनेक हमल के बावजूद उ ने अपना काम अह न श जार रखा ,ले कन ईस्ट इं डया कंपनी और ि टश हुक्म रान क नगाह म यह लोग गुनहगार थे। एक तीर से दो शकार हुए . भारत बब द हुआ और भारत को आबाद करने वाले हाथ का उनके सा ाज्य वाद को आबाद करने म उपयोग कया गया । बहरहाल … अनजान और अ न त सफ़र म पेट क भूख के लए सत्तू क पोट लय बँधी तो घर क ग़र बी और जहालत दूर करने के लए भगवान श्र ीराम क तरह वनवास को अिभशप्त हृ दय क हाहाकार म ‘मानस’ क पोथी भी साथ गई . 'प्र वासी' का यह िवशेष अंक औप नवे शक काल म लाख भारतीय श्र िमक के िव ापन एवं प्र वासन ज नत यातना से जुड़े अनेक अनुत्त रत प्र के उत्त र खोजने के साथ प्र वासन के द घ का लक स ृितक अनुभव के िविवध अनछुए पहलुओ से संवाद करने क एक पहल है। गरिम टया अतीत क ृितय को पुनज िवत करने म अधुनातन प्र ौ ो गक क ा भूिमका हो सकती है , इसी ज ासा के साथ प त्र का का प्र थम खंड '