Final Weed Management in DSR Brochure Hindi 28thjuly

धान क सीधी बुवाई मप्र बंधन खरपतवार उत्त र प्र देश म धान एक प्र मुख खाद्य ान्न फसल है तथा राज्य क खाद्य सुरा एवं कसान क आजीवका म महत्व पूण भूमका नभाती है। परंतु श्र मक क कमी, बढ़ती मजदूरी लागत तथा अनयमत एवं वलंबत मॉनसून क वषा के कारण पारंपरक वध से धान क समय पर रोपाई करना कठन होता जा रहा है। ऐसी परतय म धान क सीधी बुवाई, रोपाई वध का एक प्र भावी एवं बेहतर वकल्प बनकर उभरी है। यह तकनीक श्र म क आवश्य कता को कम करने, उादन लागत घटाने, सचाई जल क बचत करने तथा फसल क समय पर ापना सुनत करने जैसे अनेक लाभ प्र दान करती है। हालाँक, इन लाभ के बावजूद खरपतवार प्र बंधन, धान क सीधी बुवाई क सफलता म सबसे बड़ी चुनौती है, क इस पद्ध त म धान एवं खरपतवार दोन का अंकुरण लगभग एक साथ होता है तथा प्र ारंभक वृद्ध अवा म खेत म ायी जलभराव न होने के कारण खरपतवार क वृद्ध तीव्र गत से होती है। यद खरपतवार का समय पर एवं प्र भावी नयंत्र ण न कया जाए, तो वे उपज म उेखनीय कमी लाने के साथ-साथ खेती क लाभप्र दता को भी प्र भावत करते ह। इसलए धान क सीधी बुवाई ारा धान क सफल खेती के लए समेकत खरपतवार प्र बंधन को अपनाना अंत आवश्य क है।

पूव उत्त र प्र देश म धान क सीधी बुवाई प्र णाली म खरपतवार क उपत अत् यंत ववध और गतशील ह, जसके मुख् य कारक अनुकूल कृष-जलवायु परतयाँ, फसल क प्र ारंभक अवाओं म नरंतर जलभराव का अभाव और बाद मे नरंतर नमी का न होना है। पूव और मध् य उत्त र प्र देश म (Echinochloa colona, Echinochloa crus-galli), तथा (Cyperus rotundus) सबसे अधक हानकारक खरपतवार ह। जबकप्र देश के अधकांश नचले मैदानी े म धान क सीधी बुवाई म प्र मुख खरपतवार म वाषक घास के रू प म सांवा घास (Echinochloa crusgalli) और (Paspalum scrobiculatum), मोथा वग म (Cyperus iria), (Cyperus difformis) तथा (Fimbristylis miliacea), और चौड़ी पत्त ी वाले खरपतवार म (Sphenoclea zeylanica) तथा (Monochoria vaginalis) मुख् यरू प से पाए जाते ह। डीएसआर म खरपतवार क त धान क सीधी बुवाई म समेकत खरपतवार प्र बंधन Echinochloa colona Cyperus rotundus Cyperus difformis Fimbristylis miliacea Sphenoclea zeylanica Monochoria vaginalis Paspalum scrobiculatum Cyperus iria सांवा घास , जंगली धान धान का मोथा धान का मोथा नागरमोथा मोथा / नागर- मोथा छोटी मोथा घास छोटी मोथा घास जंगली कोदो जंगली कोदो झी साग / जलसाग झी साग / जलसाग छोटा मोथा / पीला मोथा छोटा मोथा / पीला मोथा जल कुी / नीला जल-पौधा जल कुी / नीला जल-पौधा धान क सीधी बुवाई म प्र भावी खरपतवार नयंत्र ण के लए वभन्न खरपतवारप्र बंधन उपाय को समत रू प से अपनाना आवश्य क है। चूँक वभन्न प्र कार के खरपतवार के प्र भावी नयंत्र ण के लए केवल एक ही शाकनाशी पयाप्त नह होता, इसलए बुवाई के बाद अंकुरण-पूव (Pre-emergence) तथा अंकुरण-पात (Post-emergence) शाकनाशय का क्र मक (Sequential) उपयोग करने क अनुशंसा क जाती है। इसके साथ ही शाकनाशी के सही छड़काव क तकनीक तथा उचत कृष पद्ध तय को अपनाने से खरपतवार नयंत्र ण क प्र भावशीलता बढ़ती है, शाकनाशय के प्र त प्र तरोधक क्ष मता (Herbicide Resistance) वकसत होने क संभावना कम होती है तथा धान क सीधी बुवाई प्र णाली म अधक उादकताप्र ाप्त होती है। सांवा घास

यांत्र क खरपतवार नयंत्र ण समेकत खरपतवार प्र बंधन का एक प्र भावी घटक है, वशेषकर उन खरपतवार के नयंत्र ण के लए जो शाकनाशी प्र योग के बाद भी खेत म रह जाते ह। जहाँ कतार के बीच पयाप्त दूरी उपलब्ध हो, वहाँ फसल क प्र ारक वृद्ध अवा म कोनो वीडर, रोटरी वीडर या पावर वीडर का उपयोग कया जा सकता है। वशुद्ध रू प से एक या दो बार यांत्र क नराई या अंकुरण-पूव या अंकुरण-पात शाकनाशय के साथ क्र मक रू प से अपनाने पर कम लागत म प्र भावी खरपतवार नयंत्र ण प्र ाप्त होता है। साथ ही, यह शाकनाशय के प्र त खरपतवार म प्र तरोधक क्ष मता वकसत होने से रोकता है। यांत्र क खरपतवार नयंत्र ण कषण याएं एवं नवारक उपाय नवारक उपाय खरपतवार के वरुद्ध पहली रक्ष ा पंक्त होते ह। प्र माणत एवं खरपतवार रहत स्वच्छ बीज का उपयोग खरपतवार क समा को कम करने म सहायक होता है। इसी प्र कार, मी क ऊपरी सतह पर मृदा-मल् च (soil mulch) बनाना धान क सीधी बुवाई म खरपतवार के नयंत्र ण तथा मी क नमी को संरक्ष त रखने म अंत प्र भावी होता है। यह देखा गया है क परंपरागत जुताई के बाद पलेवा करके वत्त र अवा म धान क सीधी बुवाई करने पर मी क सतह पर बनी मृदा-मल् च के कारण ऊपरी परत म नमी कम रहती है, जससे खरपतवार का अंकुरण कम होता है। इसके वपरीत, शुष्क मी म बुवाई करके तुरंत सचाई करने पर ऊपरी परत म पयाप्त नमी उपलब्ध हो जाती है, जससे खरपतवार का अंकुरण अधक होता है। धान क सीधी बुवाई म ेल सीडबेड एक महत्व पूण नवारक उपाय है। इसम बुवाई से पूव खेत म सचाई करके खरपतवार के बीज का अंकुरण कराया जाता है तथा उसके बाद उथली जुताई अथवा शाकनाशी का प्र योग करके इन खरपतवार को नष्ट कर दया जाता है। इससे मी म उपत खरपतवार के बीज का भंडार कम होता है तथा धान क सीधी बुवाई म प्र ारक खरपतवार क संा म उेखनीय कमी आती है। इसके अतरक्त गेँ एवं धान के बीच क खाली अवध म मूंग क फसल को शामल करने से जंगली धान सहत अनेक प्र मुख खरपतवार म कमी आती है। धान क सीधी बुवाई म खरपतवार प्र बंधन का मूल सद्ध ांत यह होना चाहए क खरपतवार का अंकुरण फसल क अपेक्ष ा वलंब से हो, जससे फसल कोप्र ारक अवा म प्र तस्प धात्म क लाभ प्र ाप्त हो सके। ववध प्र कार के खरपतवार क त म एक ही शाकनाशी सभी खरपतवार का प्र भावी तथा सूण फसलावध तक नयंत्र ण करने म सक्ष म नह होता। इसलए एकाधक वधय अथवा शाकनाशय केप्र योग को शामल करने वाला समेकत दृ ष्ट कोण प्र भावी तथा पूरे मौसम तक खरपतवार प्र बंधन प्र दान करता है। अंकुरण-पूव तथा अंकुरण-उपरांत शाकनाशय के संयोजन का उपयोग धान क सीधी बुवाई म खरपतवार के प्र भावी नयंत्र ण म सफल पाया गया है। रासायनक खरपतवार प्र बंधन वाषक घास तथा कुछ चौड़ी पत्त ी वाले खरपतवार के नयंत्र ण के लए अंकुरण पूव शाकनाशी (तालका 1) का 150 लीटर पानी म घोल बनाकर छड़काव कर। तर-वत्त र त म धान क सीधी बुवाई यद लक सीड-ल से क जाती है तो बुवाई के साथ-साथ शाकनाशी का छड़काव भी कया जाता सकता है, और यद पारंपरक बुवाई मशीन का उपयोग कया जाता है तो बुवाई के तुरंत बाद शाकनाशी का छड़काव कया जाता है। शुष्क खेत म बुवाई क त म, बुवाई के तुरंत बाद सचाई क जाती है तथा 1 -2 दन के भीतर जब खेत वत्त र अवा म आ जाए, तब शाकनाशी का छड़काव कया जा सकता है। अंकुरण-पूव (प्र ी-इमजन्स ) खेत म उपत खरपतवार के प्र कार के अनुसार, तालका 1 म दए गए कसी भी शाकनाशी का प्र योग बुवाई के 20–25 दन बाद जब खरपतवार 2–4 पी अवा म ह, 150 लीटर पानी म घोल बनाकर कया जा सकता है, जैसा क प्र ेक शाकनाशी के सामने दया गया है। अंकुरण-उपरांत (पोस्ट -इमजन्स )

नए शाकनाशी, जैसे ोपाइरॉफेन-बजाइल 2.13% + साइहैलोफ़ॉप-ूटाइल 10.64% EC 500 म.ली. प्र त एकड़ क दर पर, धान क सीधी बुवाई म ववध प्र कार के खरपतवार के नयंत्र ण म प्र भावी पाए गए ह। ोरपाइरॉफेन-बजाइल को अंतरप्र वाही फेनॉाप्र ॉप-एथाइल के साथ टक मश्र ण के रू प म उपयोग कर खरपतवार जैसे डैक्ट ाइलोक्टे नयम (Dactyloctenium) खरपतवार का भी प्र बंधन कया जा सकता है। जुताई ारा मी क मल् च परत बनाते हु ए ेल सीड बेड (stale seed bed) पद्ध त अपनाने के बाद, आवश्य कतानुसार अंकुरण-पूव तथा अंकुरण-उपरांत शाकनाशय का क्र मक उपयोग करने से खरपतवार का प्र भावी नयंत्र ण कया जा सकता है। जंगली/ लमेरा धान का रू प-रंग बोए गए धान के समान होता है, इसलए इसक पहचान और नयंत्र ण कठन होता है। इसके प्र भावी नयंत्र ण के लए ेल सीड बेड तकनीक अपनाई जाती है, जसम बुवाई से पूव सचाई कर मी क सतह के ठीक नीचे मौजूद जंगली धान के बीज को अंकुरत होने के लएप्र ोाहत कया जाता है और फर धान क बुवाई से पहले जुताई ारा उ नष्ट कर दया जाता है। इस तकनीक म उथली जुताई करना अधक उपयुक्त रहता है। बुवाई से पहले सचाई करने से खरपतवार, वशेषकर जंगली धान के बीज का तेजी से अंकुरण होता है, जससे इ आसानी से नष्ट कया जा सकता है। इस प्र क्र या से मी क ऊपरी सतह म मौजूद बीज भंडार कम हो जाता है और बाद म खरपतवार काप्र कोप घट जाता है। इसके अतरक्त , केवल प्र माणत और स्वच्छ बीज का ही उपयोग करना चाहए। सावधानी के तौर पर कसान को खेत म बीज बनने से पहले जंगली धान क बालय को नकाल देना चाहए, ताक इसका फैलाव रोका जा सके। यद कतार के बीच उपयुक्त दूरी हो, तो यांत्र क नयंत्र ण के लए कोनो-वीडर का उपयोग भी कया जा सकता है। जंगली/लमेरा धान का प्र बंधन12345 छड़काव क दक्ष ता बढ़ाने के लए पाँच प्र मुख सफारश ह: सही नोज़ल का चयन करना उपयुक्त दाब का उपयोग करना बहु -नोज़ल बूम का उपयोग करना प्र तकूल मौसम परतय म छड़काव से बचना ैक्ट र-चालत छड़काव यंत्र का उपयोग करना खरपतवारनाशी के छड़काव क तकनीक

शाकनाशी का नाम मात्र ा/एकड़प्र योग का समय नयंत्र त खरपतवार अंकुरण-पूव (ी-इमजन्स ) पडीमेथालन 30% ईसी 1300 म. ली. बुवाई के 1–2 दन भीतर ापक प्र भाव, मत खरपतवार पडीमेथालन 38.4% + पायराज़ोसुल् ूरॉन एथाइल 0.85% ज़ेडसी 800 म. ली. बुवाई के 1–2 दन भीतर ापक प्र भाव, मत खरपतवार अंकुरण-उपरांत (पोस्ट -इमजन्स ) ीमक्स ायफामोन 20% + एथॉक्स ीसल् ूरॉन 10% डूजी 90 ाम बुवाई के 12–15 दन बाद मोथा तथा अन्य घास-वगय खरपतवार, जैसे लेोोआ, डैाइलोेनयम, एराोस, ैकयारया एवं चौड़ी पी वाले खरपतवार मेट् सल् ूरॉन मथाइल (10%) + ोरीूरॉन 10% डूपी + सफट 8 ाम बुवाई के 20–25 दन बाद मोथा एवं चौड़ी पी वाले खरपतवार बसपाइरबैक सोडयम 10% एसएल + पाइराजोसल् ूरॉन इथाइल 10 डू.पी 100 म. ली. + 80 ाम बुवाई के 20–25 दन बाद ापक प्र भाव, मत खरपतवार, जनम इकनो ोआ प्र जातयाँ शामल बसपाइरबैक सोडयम 10% एसएल + मेट् सल् ूरॉन मथाइल 10% + ोरीूरॉन 10% डूपी 100 म. ली. + 8 ाम बुवाई के 20–25 दन बाद ापक प्र भाव एवं मत खरपतवार, जनम इकनोोआ प्र जातयाँ शामल बसपाइरबैक सोडयम 10% एसएल 100 म. ली. बुवाई के 20–25 दन बाद मत खरपतवार, जनम इकनोोआ प्र जात याँ शामल; लेोोआ, डैाइलोेनयम, एराोस, ैकयारया पर कम प्र भावी फेनॉक्स ाॉप-एथाइल 6.7% ईसी 450 म. ली. बुवाई के 20–25 दन बाद घास-वगय खरपतवार जैसे लेोोआ, डैाइलोेनयम, एराोस, ैकयारया आद पेनॉक्स सुलाम 1.02% + सायहेलोफॉप- ूटाइल 5.1% ओडी 900 म. ली. बुवाई के 15–20 दन बाद मत खरपतवार ोरपाइरॉक्स फेन-बजाइल 2.13% + सायहेलोफॉप-ूटाइल 10.64% ईसी 500 म. ली. बुवाई के 20–25 दन बाद ापक प्र भाव, मत खरपतवार; डैाइलोेनयम एवं एराोस पर मध्य मप्र भाव धान क सीधी बुवाई म प्र भावी खरपतवार प्र बंधन के लए अनुशंसत शाकनाशी, उनक मात्र ा तथा उपयोग का समय नीचे दया गया है: तालका 1: धान क सीधी बुवाई म खरपतवार नयंत्र ण हेतु शाकनाशी कसान को शाकनाशय के सही उपयोग तथा अन्य सवत्त म खरपतवार प्र बंधन उपाय के बारे म अी तरह प्र शत होना चाहए, ताक खरपतवार का प्र भावी नयंत्र ण कया जा सके और धान क सीधी बुवाई म खरपतवारनाशय के प्र त प्र तरोध वकसत होने से बचा जा सके।

आवश्य कता के अनुसार, अंकुरण-पूव या अंकुरण-उपरांत शाकनाशी प्र योग के दो साह बाद एक बार चुनदा ान पर हाथ से नराई- गुड़ाई अवश्य कर। बचे हु ए खरपतवार के प्र भावी प्र बंधन हेतु बीज बनने से पहले उ उखाड़कर नकाल द। फसल क प्र ारंभक अवाओं म 1 या 2 बार यांत्र क नराई, अंकुरण-पूव या अंकुरण-उपरांत शाकनाशय काक्र मश: उपयोग एक कफायती वकल्प है। उचत जल-प्र बंधन से नराई के लए श्र म लागत कम होती है तथा अतरक्त शाकनाशी के प्र योग क आवश्य कता भी घटती है। शाकनाशी के एक समान और प्र भावी छड़काव के लए ैट फैन नोज़ल लगे बहु -नोज़ल बूम का उपयोग कर, जससे खरपतवार नयंत्र ण बेहतर होता है और समय भी कम लगता है । नोट:संपक पता (वाराणसी): इरी दण एशया ेत्र ीय कद्र , जी. टी. रोड, कलेक्ट री फाम, चांदपुर, वाराणसी, उत्त र प्र देश 221106 पता (लखनऊ): 3/225, वनय खण्ड 3, गोमती नगर, लखनऊ, उत्त र प्र देश 226010 दूरभाष नंबर - (0542) 251 8900