धान क सीधी बुवाई म प्र बंधन खरपतवार उत्त र प्र देश म धान एक प्र मुख खाद्य ान्न फसल है तथा राज्य क खाद्य सुर ा एवं कसान क आजी वका म महत्व पूण भू मका नभाती है। परंतु श्र मक क कमी, बढ़ती मजदूरी लागत तथा अ नय मत एवं वलं बत मॉनसून क वषा के कारण पारंप रक व ध से धान क समय पर रोपाई करना क ठन होता जा रहा है। ऐसी प र तय म धान क सीधी बुवाई, रोपाई व ध का एक प्र भावी एवं बेहतर वकल्प बनकर उभरी है। यह तकनीक श्र म क आवश्य कता को कम करने, उ ादन लागत घटाने, स चाई जल क बचत करने तथा फसल क समय पर ापना सु न त करने जैसे अनेक लाभ प्र दान करती है। हालाँ क, इन लाभ के बावजूद खरपतवार प्र बंधन, धान क सीधी बुवाई क सफलता म सबसे बड़ी चुनौती है, क इस पद्ध त म धान एवं खरपतवार दोन का अंकुरण लगभग एक साथ होता है तथा प्र ारं भक वृ द्ध अव ा म खेत म ायी जलभराव न होने के कारण खरपतवार क वृ द्ध तीव्र ग त से होती है। य द खरपतवार का समय पर एवं प्र भावी नयंत्र ण न कया जाए, तो वे उपज म उ ेखनीय कमी लाने के साथ-साथ खेती क लाभप्र दता को भी प्र भा वत करते ह । इस लए धान क सीधी बुवाई ारा धान क सफल खेती के लए समे कत खरपतवार प्र बंधन को अपनाना अ ंत आवश्य क है।
पूव उत्त र प्र देश म धान क सीधी बुवाई प्र णाली म खरपतवार क उप त अत् यंत व वध और ग तशील ह , जसके मुख् य कारक अनुकूल कृ ष-जलवायु प र तयाँ, फसल क प्र ारं भक अव ाओं म नरंतर जलभराव का अभाव और बाद मे नरंतर नमी का न होना है। पूव और मध् य उत्त र प्र देश म (Echinochloa colona, Echinochloa crus-galli), तथा (Cyperus rotundus) सबसे अ धक हा नकारक खरपतवार ह । जब कप्र देश के अ धकांश नचले मैदानी े म धान क सीधी बुवाई म प्र मुख खरपतवार म वा ष क घास के रू प म सांवा घास (Echinochloa crusgalli) और (Paspalum scrobiculatum), मोथा वग म (Cyperus iria), (Cyperus difformis) तथा (Fimbristylis miliacea), और चौड़ी पत्त ी वाले खरपतवार म (Sphenoclea zeylanica) तथा (Monochoria vaginalis) मुख् यरू प से पाए जाते ह । डीएसआर म खरपतवार क त धान क सीधी बुवाई म समे कत खरपतवार प्र बंधन Echinochloa colona Cyperus rotundus Cyperus difformis Fimbristylis miliacea Sphenoclea zeylanica Monochoria vaginalis Paspalum scrobiculatum Cyperus iria सांवा घास , जंगली धान धान का मोथा धान का मोथा नागरमोथा मोथा / नागर- मोथा छोटी मोथा घास छोटी मोथा घास जंगली कोदो जंगली कोदो झ ी साग / जलसाग झ ी साग / जलसाग छोटा मोथा / पीला मोथा छोटा मोथा / पीला मोथा जल कु ी / नीला जल-पौधा जल कु ी / नीला जल-पौधा धान क सीधी बुवाई म प्र भावी खरपतवार नयंत्र ण के लए व भन्न खरपतवारप्र बंधन उपाय को सम त रू प से अपनाना आवश्य क है। चूँ क व भन्न प्र कार के खरपतवार के प्र भावी नयंत्र ण के लए केवल एक ही शाकनाशी पया प्त नह होता, इस लए बुवाई के बाद अंकुरण-पूव (Pre-emergence) तथा अंकुरण-प ात (Post-emergence) शाकना शय का क्र मक (Sequential) उपयोग करने क अनुशंसा क जाती है। इसके साथ ही शाकनाशी के सही छड़काव क तकनीक तथा उ चत कृ ष पद्ध तय को अपनाने से खरपतवार नयंत्र ण क प्र भावशीलता बढ़ती है, शाकना शय के प्र त प्र तरोधक क्ष मता (Herbicide Resistance) वक सत होने क संभावना कम होती है तथा धान क सीधी बुवाई प्र णाली म अ धक उ ादकताप्र ाप्त होती है। सांवा घास
यां त्र क खरपतवार नयंत्र ण समे कत खरपतवार प्र बंधन का एक प्र भावी घटक है, वशेषकर उन खरपतवार के नयंत्र ण के लए जो शाकनाशी प्र योग के बाद भी खेत म रह जाते ह । जहाँ कतार के बीच पया प्त दूरी उपलब्ध हो, वहाँ फसल क प्र ार क वृ द्ध अव ा म कोनो वीडर, रोटरी वीडर या पावर वीडर का उपयोग कया जा सकता है। वशुद्ध रू प से एक या दो बार यां त्र क नराई या अंकुरण-पूव या अंकुरण-प ात शाकना शय के साथ क्र मक रू प से अपनाने पर कम लागत म प्र भावी खरपतवार नयंत्र ण प्र ाप्त होता है। साथ ही, यह शाकना शय के प्र त खरपतवार म प्र तरोधक क्ष मता वक सत होने से रोकता है। यां त्र क खरपतवार नयंत्र ण कष ण याएं एवं नवारक उपाय नवारक उपाय खरपतवार के वरुद्ध पहली रक्ष ा पं क्त होते ह । प्र मा णत एवं खरपतवार र हत स्वच्छ बीज का उपयोग खरपतवार क सम ा को कम करने म सहायक होता है। इसी प्र कार, म ी क ऊपरी सतह पर मृदा-मल् च (soil mulch) बनाना धान क सीधी बुवाई म खरपतवार के नयंत्र ण तथा म ी क नमी को संर क्ष त रखने म अ ंत प्र भावी होता है। यह देखा गया है क परंपरागत जुताई के बाद पलेवा करके वत्त र अव ा म धान क सीधी बुवाई करने पर म ी क सतह पर बनी मृदा-मल् च के कारण ऊपरी परत म नमी कम रहती है, जससे खरपतवार का अंकुरण कम होता है। इसके वपरीत, शुष्क म ी म बुवाई करके तुरंत स चाई करने पर ऊपरी परत म पया प्त नमी उपलब्ध हो जाती है, जससे खरपतवार का अंकुरण अ धक होता है। धान क सीधी बुवाई म ेल सीडबेड एक महत्व पूण नवारक उपाय है। इसम बुवाई से पूव खेत म स चाई करके खरपतवार के बीज का अंकुरण कराया जाता है तथा उसके बाद उथली जुताई अथवा शाकनाशी का प्र योग करके इन खरपतवार को नष्ट कर दया जाता है। इससे म ी म उप त खरपतवार के बीज का भंडार कम होता है तथा धान क सीधी बुवाई म प्र ार क खरपतवार क सं ा म उ ेखनीय कमी आती है। इसके अ त रक्त गे ँ एवं धान के बीच क खाली अव ध म मूंग क फसल को शा मल करने से जंगली धान स हत अनेक प्र मुख खरपतवार म कमी आती है। धान क सीधी बुवाई म खरपतवार प्र बंधन का मूल सद्ध ांत यह होना चा हए क खरपतवार का अंकुरण फसल क अपेक्ष ा वलंब से हो, जससे फसल कोप्र ार क अव ा म प्र तस्प धा त्म क लाभ प्र ाप्त हो सके। व वध प्र कार के खरपतवार क त म एक ही शाकनाशी सभी खरपतवार का प्र भावी तथा स ूण फसलाव ध तक नयंत्र ण करने म सक्ष म नह होता। इस लए एका धक व धय अथवा शाकना शय केप्र योग को शा मल करने वाला समे कत दृ ष्ट कोण प्र भावी तथा पूरे मौसम तक खरपतवार प्र बंधन प्र दान करता है। अंकुरण-पूव तथा अंकुरण-उपरांत शाकना शय के संयोजन का उपयोग धान क सीधी बुवाई म खरपतवार के प्र भावी नयंत्र ण म सफल पाया गया है। रासाय नक खरपतवार प्र बंधन वा ष क घास तथा कुछ चौड़ी पत्त ी वाले खरपतवार के नयंत्र ण के लए अंकुरण पूव शाकनाशी (ता लका 1) का 150 लीटर पानी म घोल बनाकर छड़काव कर । तर-वत्त र त म धान क सीधी बुवाई य द लक सीड- ल से क जाती है तो बुवाई के साथ-साथ शाकनाशी का छड़काव भी कया जाता सकता है, और य द पारंप रक बुवाई मशीन का उपयोग कया जाता है तो बुवाई के तुरंत बाद शाकनाशी का छड़काव कया जाता है। शुष्क खेत म बुवाई क त म , बुवाई के तुरंत बाद स चाई क जाती है तथा 1 -2 दन के भीतर जब खेत वत्त र अव ा म आ जाए, तब शाकनाशी का छड़काव कया जा सकता है। अंकुरण-पूव (प्र ी-इमज न्स ) खेत म उप त खरपतवार के प्र कार के अनुसार, ता लका 1 म दए गए कसी भी शाकनाशी का प्र योग बुवाई के 20–25 दन बाद जब खरपतवार 2–4 प ी अव ा म ह , 150 लीटर पानी म घोल बनाकर कया जा सकता है, जैसा क प्र ेक शाकनाशी के सामने दया गया है। अंकुरण-उपरांत (पोस्ट -इमज न्स )
नए शाकनाशी, जैसे ोपा इरॉ फेन-ब जाइल 2.13% + साइहैलोफ़ॉप- ूटाइल 10.64% EC 500 म.ली. प्र त एकड़ क दर पर, धान क सीधी बुवाई म व वध प्र कार के खरपतवार के नयंत्र ण म प्र भावी पाए गए ह । ोरपाइरॉ फेन-ब जाइल को अंतरप्र वाही फेनॉ ाप्र ॉप-एथाइल के साथ ट क मश्र ण के रू प म उपयोग कर खरपतवार जैसे डैक्ट ाइलोक्टे नयम (Dactyloctenium) खरपतवार का भी प्र बंधन कया जा सकता है। जुताई ारा म ी क मल् च परत बनाते हु ए ेल सीड बेड (stale seed bed) पद्ध त अपनाने के बाद, आवश्य कतानुसार अंकुरण-पूव तथा अंकुरण-उपरांत शाकना शय का क्र मक उपयोग करने से खरपतवार का प्र भावी नयंत्र ण कया जा सकता है। जंगली/ लमेरा धान का रू प-रंग बोए गए धान के समान होता है, इस लए इसक पहचान और नयंत्र ण क ठन होता है। इसके प्र भावी नयंत्र ण के लए ेल सीड बेड तकनीक अपनाई जाती है, जसम बुवाई से पूव स चाई कर म ी क सतह के ठीक नीचे मौजूद जंगली धान के बीज को अंकु रत होने के लएप्र ो ा हत कया जाता है और फर धान क बुवाई से पहले जुताई ारा उ नष्ट कर दया जाता है। इस तकनीक म उथली जुताई करना अ धक उपयुक्त रहता है। बुवाई से पहले स चाई करने से खरपतवार , वशेषकर जंगली धान के बीज का तेजी से अंकुरण होता है, जससे इ आसानी से नष्ट कया जा सकता है। इस प्र क्र या से म ी क ऊपरी सतह म मौजूद बीज भंडार कम हो जाता है और बाद म खरपतवार काप्र कोप घट जाता है। इसके अ त रक्त , केवल प्र मा णत और स्वच्छ बीज का ही उपयोग करना चा हए। सावधानी के तौर पर कसान को खेत म बीज बनने से पहले जंगली धान क बा लय को नकाल देना चा हए, ता क इसका फैलाव रोका जा सके। य द कतार के बीच उपयुक्त दूरी हो, तो यां त्र क नयंत्र ण के लए कोनो-वीडर का उपयोग भी कया जा सकता है। जंगली/लमेरा धान का प्र बंधन12345 छड़काव क दक्ष ता बढ़ाने के लए पाँच प्र मुख सफा रश ह : सही नोज़ल का चयन करना उपयुक्त दाब का उपयोग करना बहु -नोज़ल बूम का उपयोग करना प्र तकूल मौसम प र तय म छड़काव से बचना ैक्ट र-चा लत छड़काव यंत्र का उपयोग करना खरपतवारनाशी के छड़काव क तकनीक
शाकनाशी का नाम मात्र ा/एकड़प्र योग का समय नयं त्र त खरपतवार अंकुरण-पूव ( ी-इमज न्स ) प डीमेथा लन 30% ईसी 1300 म. ली. बुवाई के 1–2 दन भीतर ापक प्र भाव, म त खरपतवार प डीमेथा लन 38.4% + पायराज़ोसुल् ूरॉन एथाइल 0.85% ज़ेडसी 800 म. ली. बुवाई के 1–2 दन भीतर ापक प्र भाव, म त खरपतवार अंकुरण-उपरांत (पोस्ट -इमज न्स ) ी मक्स ायफामोन 20% + एथॉक्स ीसल् ूरॉन 10% ड ूजी 90 ाम बुवाई के 12–15 दन बाद मोथा तथा अन्य घास-वग य खरपतवार, जैसे ले ो ोआ, डै ाइलो े नयम, एरा ो स, ै कया रया एवं चौड़ी प ी वाले खरपतवार मेट् सल् ूरॉन मथाइल (10%) + ोरी ूरॉन 10% ड ूपी + सफ ट 8 ाम बुवाई के 20–25 दन बाद मोथा एवं चौड़ी प ी वाले खरपतवार बसपाइ रबैक सो डयम 10% एसएल + पाइराजोसल् ूरॉन इथाइल 10 ड ू.पी 100 म. ली. + 80 ाम बुवाई के 20–25 दन बाद ापक प्र भाव, म त खरपतवार, जनम इ कनो ोआ प्र जा तयाँ शा मल बसपाइ रबैक सो डयम 10% एसएल + मेट् सल् ूरॉन मथाइल 10% + ोरी ूरॉन 10% ड ूपी 100 म. ली. + 8 ाम बुवाई के 20–25 दन बाद ापक प्र भाव एवं म त खरपतवार, जनम इ कनो ोआ प्र जा तयाँ शा मल बसपाइ रबैक सो डयम 10% एसएल 100 म. ली. बुवाई के 20–25 दन बाद म त खरपतवार, जनम इ कनो ोआ प्र जा त याँ शा मल; ले ो ोआ, डै ाइलो े नयम, एरा ो स, ै कया रया पर कम प्र भावी फेनॉक्स ा ॉप-एथाइल 6.7% ईसी 450 म. ली. बुवाई के 20–25 दन बाद घास-वग य खरपतवार जैसे ले ो ोआ, डै ाइलो े नयम, एरा ो स, ै कया रया आ द पेनॉक्स सुलाम 1.02% + सायहेलोफॉप- ूटाइल 5.1% ओडी 900 म. ली. बुवाई के 15–20 दन बाद म त खरपतवार ोरपाइरॉ क्स फेन-ब जाइल 2.13% + सायहेलोफॉप- ूटाइल 10.64% ईसी 500 म. ली. बुवाई के 20–25 दन बाद ापक प्र भाव, म त खरपतवार; डै ाइलो े नयम एवं एरा ो स पर मध्य मप्र भाव धान क सीधी बुवाई म प्र भावी खरपतवार प्र बंधन के लए अनुशं सत शाकनाशी, उनक मात्र ा तथा उपयोग का समय नीचे दया गया है: ता लका 1: धान क सीधी बुवाई म खरपतवार नयंत्र ण हेतु शाकनाशी कसान को शाकना शय के सही उपयोग तथा अन्य सव त्त म खरपतवार प्र बंधन उपाय के बारे म अ ी तरह प्र श त होना चा हए, ता क खरपतवार का प्र भावी नयंत्र ण कया जा सके और धान क सीधी बुवाई म खरपतवारना शय के प्र त प्र तरोध वक सत होने से बचा जा सके।
आवश्य कता के अनुसार, अंकुरण-पूव या अंकुरण-उपरांत शाकनाशी प्र योग के दो स ाह बाद एक बार चु न दा ान पर हाथ से नराई- गुड़ाई अवश्य कर । बचे हु ए खरपतवार के प्र भावी प्र बंधन हेतु बीज बनने से पहले उ उखाड़कर नकाल द । फसल क प्र ारं भक अव ाओं म 1 या 2 बार यां त्र क नराई, अंकुरण-पूव या अंकुरण-उपरांत शाकना शय काक्र मश: उपयोग एक कफायती वकल्प है। उ चत जल-प्र बंधन से नराई के लए श्र म लागत कम होती है तथा अ त रक्त शाकनाशी के प्र योग क आवश्य कता भी घटती है। शाकनाशी के एक समान और प्र भावी छड़काव के लए ैट फैन नोज़ल लगे बहु -नोज़ल बूम का उपयोग कर , जससे खरपतवार नयंत्र ण बेहतर होता है और समय भी कम लगता है । नोट:संपक पता (वाराणसी): इरी द ण ए शया ेत्र ीय क द्र , जी. टी. रोड, कलेक्ट री फाम , चांदपुर, वाराणसी, उत्त र प्र देश 221106 पता (लखनऊ): 3/225, वनय खण्ड 3, गोमती नगर, लखनऊ, उत्त र प्र देश 226010 दूरभाष नंबर - (0542) 251 8900