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स्नेह के रंग, सा हत् य के संग ♥ प् या रे ब क त र फ से स े म भ ट ♥ ❀ बा ल सा हत् य व शे ष ❀
कुछ कहा नयाँ केवल पढ़ नह जात , जीवन भर वे हमारे साथ रह जाती ह । कुछ क वताएँ केवल शब् द नह होत , वे हमारे भीतर कोई भाव जगा जाती ह । और कुछ लेखक ऐसे होते ह , जनक रचनाएँ एक पीढ़ से दू सरी पीढ़ तक पहुँ चती रहती ह । यह पुस् तक आपके लए ऐसी ही कुछ रचनाओं का संकलन है। इसम आप ह द सा हत् य के उन रचनाकार क कहा नयाँ और क वताएँ पढ़ गे, जनक रचनाएँ वष से हमारे सा हत् य का हस् सा रही ह । प्रे मचन् द, महादेवी वमा , माखनलाल चतुव द और ऐसे ही अनेक सा हत् यकार ने अपने शब् द के माध् यम से मनुष् य, समाज, प्र कृ त, रश् त , संवेदनाओं और जीवन को समझा,ने क को शश क है। इन रचनाओं को पढ़ते हु ए शायद आपको कुछ ऐसी बात मल गी, जनसे आप सहमत ह गे, कुछ ऐसी, जन पर आप प्रश्न करना चाह गे और कुछ ऐसी जन् ह पढ़कर आप देर तक सोचते रह गे। यही सा हत् य क खूबसूरती है, हर बार पढ़ने पर वह हम कुछ नया दखा सकता है। इस पुस् तक को आपके लए और भी वशेष बनाते ह इसके चत्र । इन सा हत् यकार के चत्र हमारे ही ब ने बनाए ह । उन् ह ने तस् वीर को ध् यान से देखा, रेखाओं और अनुपात को समझा, प्र काश और छाया को प सल से उकेरा और धीरे-धीरे इन चेहर को कागज़ पर उतारा। इस लए इस पुस् तक म दो पी ढ़याँ साथ दखाई देती ह , एक पीढ़ के शब् द और दू सरी पीढ़ क रेखाएँ। हम आपको यह पुस् तक केवल पढ़ने के लए नह दे रहे ह । हम चाहते ह क आप इसे अपना समझ । इसम से कोई कहानी चुन , कोई क वता बार-बार पढ़ , कसी पात्र से जुड़ , कसी वचार पर सहमत या असहमत ह या कसी पं को अपने पास रख ल । क् य क सा हत् य क वरासत एक ऐसी परंपरा है जसे न केवल सँभालकर रखा जाता है, ब क उसे पढ़ा जाता है, समझा जाता है, महसूस कया जाता है और फर आगे बढ़ाया जाता है। आज यह पुस् तक आपके हाथ म है। कल शायद आप ही इसे कसी और ब े तक पहुँ चाएँगे। यही आपक सा ह त् यक वरासत है। शुभकामनाएँ! व ालय प रवार एक सा ह त् यक वरासत
मुंशी ेमचंद- ह द सा हत् य के स ाट
मुंशी ेमचंद